धर्म क्या?नियम क्या?JAINSADHVI VAIBHAVSHREEAatmaJiMS||Religion v/s Rituals|JAINISM||Jain way of life

Posted By on July 12, 2019

Posted by Lewis Heart

This article has 12 comments

  1. नाम ताे अपने पसन्दका जाे भि रखें अन्तर कुछ नहि पडता ,क्याें कि नामसे ज्यादा अपना लाभपर दृष्टि रखते कर्म जाे करते हे, नाम अात्माज्ञानी रखे या ज्ञानीअात्मा कर्म असत हो या अज्ञानी नाम ताे हे ज्ञानी, अात्माका नाम भि हर काेहि ले ,न ले काेइ कानुन नहि। जाे मनुष्य काे अात्माका ज्ञान हो ,ताे वे अात्मा स्वरुपमे रह व्यवहार वाणी दृष्टि वृत्ति हाे ताे हि अात्माज्ञानी कहना या कहलाना अर्थलगे, चेहरा चलन देहस्वरुप वाले का अौर नाम अात्माज्ञानी रखना अनर्थ क्याें नहि ! महाेदया ! चिन्तन करें ! अन्यथा न लगे ताे ! रहा धर्म ; वास्तविक इतिहास पर चिन्तन करें ताे संसारमे एक हि पुरातन व शाश्वत धर्म हे सनातन धर्म यानी सत्य दुसरा काेइ नहि, सत्य हि अादिअनादि हे जाे अविनाशी हे। जिसका मर्यादा हे सत्य मार्ग पर चलना। सत् मार्गपर सत् हि चल सके असत्य नहि, संसारकाे हरपल परिवर्तनशिल हाेने के कारण अनित्य देख नश्वर व विनाशि कह असत्य कहे पर जगत ताे जवसे हे तब से अाज तक वह अपना कर्तव्यसे च्युत कभि हुए नहि, कर्तव्य मे हेरफेर ताे इसि अनित्य कहे जानेवाले संसार का उपभाेगी हे जीवात्मा, जीवात्मा मे भि दाे एक प्रकृति दुसरा अात्मा यह दाेनाेका संयाेजन से जीवात्मा बना, इन दाे मे एक हे सत्य(अात्मा) अौर दुसरा हे जीव या देह जाे संसार सा प्रतिपल बडलते रहते हे जिसे अनित्य व असत्य कहा गया। देह मे रहते भि अात्मा स्वरुपका व्यवहार हि करनेवाले काे हि धार्मिक व सत्य कहे हे। पुरातन व सर्वशास्त्रमयि शिराेमणी शास्त्राेंमे श्रीमद्भगवद्गीता का २:१३ अौर २:१६ मे यहि देह अौर देहि मे सत्य अौर असतका निर्क्याेल किए हे जाे अति सान्दर्भिक भि हे। अापका मुह पर पत्ती रखना अस्वाभाविक अौर असत यानी अात्माज्ञानीका न होकर देहज्ञानीका संकेत हे महाेदया ! यानी यह अशाश्वत हे, जाे अशाश्वतमे रहते जितने भि अादर्शका दर्शन दे वह काेइ अर्थका नहि। अगर यह प्रचलन सत्य हाेताताे हमारा जन्मके साथ हि पत्ती सहित संसारमे यानी सभि मानवके मुह पत्ती साथ जनम लेते, यह अधार्मिक हि दिखे, जाे नहि उसकाे उपरसे बनाना असत्य हे यहि से स्पष्ट हे कि अाप महाेदया से सत्य का अाश न करना हि बुद्धिमानी दिखे ,अन्य अर्थ न लगे, यह चिन्तन हि हे।हाँ अापमे प्रतिभा कुटकुट कर भरे हे इसमे शंका नहि पर सत्य देनेमे अग्रसर बने ताे हि चरम मंगल सवका बने, कमेन्ट नहि चिन्तन हे। धन्यवाद !!!

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  2. Jai Ho❣
    🙏Maharaj Saheb, Aap bahut hi achhe aur saral tareke se samjate ho…🙏
    Feel blessed to have You as Guru…😊🤲

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